हिन्दी मुहावरे

नवम्बर 13, 2006

Filed under: अ से अः — muhavara @ 8:37 पूर्वाह्न

अंक देनाआलिंगन करना.

प्रेम से वशीभूत वह बहुत देर तक अंक दिये रहा.

अंग-अंग ढीले होना – थका होना

शाम को घर पहुंचते पहुंचते अंग-अंग ढीले हो चुके होते हैं.

अगं-अंग मुस्काना – रोम रोम से प्रसन्नता छलकना

लक्ष्य प्राप्ति पर उसके अंग – अंग मुस्काने लगे.  

अंग टूटना – बदन में दर्द होना.

बुखार होने से उसके अंग टूटने लगे थे.

अंग धरना – पहनना/धारण करना.

ऋत के अनुसार वस्त्र अंग धरने चाहिए.

अंग से अंग चुराना – संकुचित होना

आज कल बाज़ारों में इतनी भीड़ होती है की चलते समय अंग से अंग चुराने पड़ते है. 

अंग लगना – हजम हो जाना/काम में आना

रोज रोज के पकवान उसके अंग लग गये हैं.

अंग लगाना – लिपटना

दिनों बाद मिले मित्र को उसने अंग लगा लिया.

अंगारे उगलना – जली-कटी कहना/दुर्वचन कहना.

खिड़की का काँच टूटा तो सुनिता बच्चों पर अंगारे उगलने लगी.

अंगारे बरसना _ तेज धूप पड़ना

जयेष्ठ माह में अंगारे बरसते हैं.

अंगार सिर पर रखना – कष्ट सहना

कर्महीन व्यक्ति के सिर पर अंगार रहते है.

अंगारों पर लोटना – ईष्या से जलना

सौतन को सामने देख वह अंगारों पर लोटने लगी.

अंगुठा चुसना – खुशामद करना / धीन होना

स्वाभिमानी कभी किसीका अंगुठा नहीं चुसते.

अंचल पसारना - नम्रता से मांगना

जरूरतमंद हर किसी के आगे अंचल पसारता है.

अंजर पंजर ढीले होना – पुर्जो का बिगड़ जाना/अभिमान नष्ट होना/ अंग अंग ढीले होना

दस किलोमिटर चलते ही उसके तो अंजर पंजर ढीले हो गए.

अंटी बाज – दगाबाज

सावधान रहना, वह अंटीबाज है.

अंटी में रखना – छिपाकर रखना

सत्य कभी अंटी में नहीं रखा रहता.

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